रास्तों के जुगनू
Saturday, May 9, 2020
हमारे स्वप्न को मज़बूर ये भरपूर करता है,
इकठ्ठा हो गया था जो अहं वो चूर करता है,
कभी सोचा न था परदों से होगा इतना याराना,
ये कैसा रोग है नज़दीकियों को दूर करता है,
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