Friday, October 27, 2023

 

 

छोड़ना मुमकिन नहीं है,
वो भी जो हासिल नहीं है,
ख़्वाहिशों का इक पुलिंदा,
पूर्ण लेकिन कुछ नहीं है;

रात की ठहरी सी आशा,
रोज़ दिन रहता है प्यासा,
मरु सरीखी ज़िंदगी में,
क्यों है बाकी यह पिपासा; 

​क्या जवानी क्या लड़कपन,
दे दिया जितना भी था मन,
प्रेम लेकिन मिला जैसे,
ओस का अधजिया जीवन ;

 

Wednesday, October 18, 2023

 

इन दिनों कोई नहीं बुलाता हमें,
जैसे तुम बुलाते थे,
कोई और नहीं बताता हमें,
जैसे तुम बताते थे;

इन दिनों कोई नहीं जानता हमें,
जैसे तुम जानते थे,
कोई और मानता नहीं,
जैसे तुम मानते थे;

इन दिनों कोई नहीं है,
न बात करने को, न बात कहने को,
वो बात जो हम अक्सर करते थे,
जो सिर्फ हम समझते थे;

तुम्हारी चुप्पी,
शायद मनमर्ज़ी नहीं है,
नाजायज़ तो बिलकुल नहीं,
पर चुप्पी तो है ;