जीवन खुद ही स्मृतियों की बारात है,
उसपर शिक्षक होना अद्भुत सौगात है,
यूँ रहा ये सफर तीन दशकों से अधिक,
पर लगता है मानो कल की ही बात है;
इस सफर में हम स्वयं ही पढ़े भी, पढ़ाया भी,
इस सफर में हम स्वयं ही सीखे भी, सिखाया भी;
सबसे अहम् किरदार किन्तु साथ रहा है आपका,
इस सफर में संग जिसके बढ़े भी, बढ़ाया भी;
ये नहीं ख़्वाहिश है कोई नाम अपना याद रक्खे,
ये भी नहीं कि छात्र कोई काम अपना याद रक्खे,
आँख लेकिन छलछला जाएँगी अपनी जब कभी,
इस सफर की सीख से कोई नई बुनियाद रक्खे;