तू गर राह में फरमान सा न आया होता,
मैं ही होता था यहाँ और मेरा साया होता,
खुशबुओं से कोई निशान भी नहीं होता,
कागज़ों से जो कहीं दिल को लगाया होता,
जिंदगी यूँ ही नहीं कटती रोजगारी में,
गर कमाने का हुनर खुद में ही पाया होता,
ऐसे सब लोग मुझे छोड़ कर नहीं जाते,
कुछ अगर दर्द कहीं मैंने भी छुपाया होता,
एक घर हम भी कहीं पर तो बनाते 'नीरज',
बेचना खुद को सलीके से जो आया होता,
बेचना खुद को सलीके से जो आया होता,


