वो अनकही बात पर यकीन किया करता है,
अपने आसमानों को ज़मीन किया करता है,
कर के हर बार सरेआम से परदा 'नीरज ' ,
खामशी की नज़्म को ग़मगीन किया करता है ;
अपने आसमानों को ज़मीन किया करता है,
कर के हर बार सरेआम से परदा 'नीरज ' ,
खामशी की नज़्म को ग़मगीन किया करता है ;

