जब जब लिहाफ़ की सिलाई उधड़ जाती है,
तब तुम कहाँ जाते हो,
क्यों नहीं व्योम बनकर गली में उतर आते हो !
उजली पोशाकों में करिया करवाता है,
कोयल की बोली में कौवा बतियाता है,
विज्ञान का अधमरा मानव क्यों न शर्मिंदा हो,
कैसे विश्वास करें कि तुम अब भी जिंदा हो,
यूँ तो अभी भी खेतों की सरसों पीली है,
कोयल की बोली में कौवा बतियाता है,
विज्ञान का अधमरा मानव क्यों न शर्मिंदा हो,
कैसे विश्वास करें कि तुम अब भी जिंदा हो,
यूँ तो अभी भी खेतों की सरसों पीली है,

No comments:
Post a Comment