Thursday, January 31, 2013
Translation
After a while you learn the subtle difference
Between holding a hand and chaining a soul,
And you learn that love doesn't mean leaning
And company doesn't mean security.
And you begin to learn that kisses aren't contracts
And presents aren't promises,
And you begin to accept your defeats
With your head up and your eyes open
With the grace of a woman, not the grief of a child,
And you learn to build all your roads on today
Because tomorrow's ground is too uncertain for plans
And futures have a way of falling down in mid-flight.
After a while you learn...
That even sunshine burns if you get too much.
So you plant your garden and decorate your own soul,
Instead of waiting for someone to bring you flowers.
And you learn that you really can endure...
That you really are strong
And you really do have worth...
And you learn and learn...
With every good-bye you learn.
― Jorge Luis Borges
वह हल्का सा अंतर हाथ थामने और रूह बाँधने का,
समझ जाते हो तुम, कुछ समय के बाद,और समझ जाते हो तुम कि प्यार का अर्थ आश्रय नहीं,
और न ही संगत का अर्थ सुरक्षा है,
और समझने लगते हो तुम की चुम्बन इकरारनामा नहीं,
और न ही तोहफे हैं कोई वादा,
और आरंभ कर देते हो तुम मानना शिकस्त को,
सर उठा कर, आँखों को खोलकर,
बालक के वियोग की तरह नहीं, स्त्री की मनोहरता की तरह,
और सीखते हो तुम अपने रास्ते वर्तमान में बनाना,
क्योंकि कल किसी भी योजना के लिए अनिश्चित है,
आर भविष्य की तो फितरत है बीच उड़ानों से गिरना,
कुछ समय पश्चात तुम सीखते हो,
कि अत्यधिक धूप भी जला देती है,तो बजाय इसके कि कोई लाये गुलदस्ता तुम्हारे लिए,
तुम अपनी क्यारी लगाते हो, अपनी रूह संवारते हो,और सीखते हो कि तुम सच में सह सकते हो,कि तुम सच में ताक़तवर हो,
और तुम्हारा अपना भी मोल है,और सीखते ही रहते हो तुम,
हर ज़ुदाई के बाद .......
After a while you learn the subtle difference
Between holding a hand and chaining a soul,
And you learn that love doesn't mean leaning
And company doesn't mean security.
And you begin to learn that kisses aren't contracts
And presents aren't promises,
And you begin to accept your defeats
With your head up and your eyes open
With the grace of a woman, not the grief of a child,
And you learn to build all your roads on today
Because tomorrow's ground is too uncertain for plans
And futures have a way of falling down in mid-flight.
After a while you learn...
That even sunshine burns if you get too much.
So you plant your garden and decorate your own soul,
Instead of waiting for someone to bring you flowers.
And you learn that you really can endure...
That you really are strong
And you really do have worth...
And you learn and learn...
With every good-bye you learn.
― Jorge Luis Borges
वह हल्का सा अंतर हाथ थामने और रूह बाँधने का,
समझ जाते हो तुम, कुछ समय के बाद,और समझ जाते हो तुम कि प्यार का अर्थ आश्रय नहीं,
और न ही संगत का अर्थ सुरक्षा है,
और समझने लगते हो तुम की चुम्बन इकरारनामा नहीं,
और न ही तोहफे हैं कोई वादा,
और आरंभ कर देते हो तुम मानना शिकस्त को,
सर उठा कर, आँखों को खोलकर,
बालक के वियोग की तरह नहीं, स्त्री की मनोहरता की तरह,
और सीखते हो तुम अपने रास्ते वर्तमान में बनाना,
क्योंकि कल किसी भी योजना के लिए अनिश्चित है,
आर भविष्य की तो फितरत है बीच उड़ानों से गिरना,
कुछ समय पश्चात तुम सीखते हो,
कि अत्यधिक धूप भी जला देती है,तो बजाय इसके कि कोई लाये गुलदस्ता तुम्हारे लिए,
तुम अपनी क्यारी लगाते हो, अपनी रूह संवारते हो,और सीखते हो कि तुम सच में सह सकते हो,कि तुम सच में ताक़तवर हो,
और तुम्हारा अपना भी मोल है,और सीखते ही रहते हो तुम,
हर ज़ुदाई के बाद .......
Thursday, January 24, 2013
Saturday, January 19, 2013
Wednesday, January 16, 2013
Monday, January 14, 2013
भूख तो दो पर मुझे कुछ कौर भी दो,
ऐ मेरे विस्तार मुझे कुछ और भी दो,
हवाओं में ढके चेहरे,
सुबह के वह रंग सुनहरे,
अमावस का सोया चाँद,
थोडा सा खोया उन्माद,
बिखरता पर सजता विज्ञान,
खुशबुओं का झूठा ज्ञान,
दिवस की वह दिशा निराली,
रात की मदहोश लाली,
झांकती किरणों में वनवास,
विवाहिता का उपवास,
मुरझाये पुष्प की कहानी,
बारिशों की बेईमानी,
ओस का अधजिया जीवन,
धूप का पिघला हुआ मन,
वो हया के गुसलखाने,
फिर वही भूले बहाने,
पंचवटी की तलहटी,
बचपना अबोध हठी,
भावों की वह चित्रकारी,
बेबसी मेरी तुम्हारी,
भूख तो दो पर मुझे कुछ कौर भी दो,
ऐ मेरे विस्तार मुझे कुछ और भी दो,
ऐ मेरे विस्तार मुझे कुछ और भी दो,
हवाओं में ढके चेहरे,
सुबह के वह रंग सुनहरे,
अमावस का सोया चाँद,
थोडा सा खोया उन्माद,
बिखरता पर सजता विज्ञान,
खुशबुओं का झूठा ज्ञान,
दिवस की वह दिशा निराली,
रात की मदहोश लाली,
झांकती किरणों में वनवास,
विवाहिता का उपवास,
मुरझाये पुष्प की कहानी,
बारिशों की बेईमानी,
ओस का अधजिया जीवन,
धूप का पिघला हुआ मन,
वो हया के गुसलखाने,
फिर वही भूले बहाने,
पंचवटी की तलहटी,
बचपना अबोध हठी,
भावों की वह चित्रकारी,
बेबसी मेरी तुम्हारी,
भूख तो दो पर मुझे कुछ कौर भी दो,
ऐ मेरे विस्तार मुझे कुछ और भी दो,
Sunday, January 13, 2013
Tuesday, January 8, 2013
Friday, January 4, 2013
Thursday, January 3, 2013
Wednesday, January 2, 2013
गुजरता वक़्त और भागती अवस्था,
मेहनत पर वक़्त की शिथिलता,
पूस की ठिठुरन और जमता लहू,
अकस्मात पर वही रात हूबहू,
कुछ अपनों से दूर गुज़रते पल,
वही चिर परिचित कोलाहल,
नया आयाम पर खोने का डर,
अस्थिर पहचाना सा बवंडर,
कलेंडर नया, चरमराती व्यवस्था,
सांप सी लटकती वही प्रथा,
प्रतिकूल है आज पर कल जान जाओगे,
तुम भला मुझे क्या हरा पाओगे।
मेहनत पर वक़्त की शिथिलता,
पूस की ठिठुरन और जमता लहू,
अकस्मात पर वही रात हूबहू,
कुछ अपनों से दूर गुज़रते पल,
वही चिर परिचित कोलाहल,
नया आयाम पर खोने का डर,
अस्थिर पहचाना सा बवंडर,
कलेंडर नया, चरमराती व्यवस्था,
सांप सी लटकती वही प्रथा,
प्रतिकूल है आज पर कल जान जाओगे,
तुम भला मुझे क्या हरा पाओगे।
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