Monday, January 14, 2013

भूख तो दो पर मुझे कुछ कौर भी दो,
ऐ मेरे विस्तार मुझे कुछ और भी दो,
हवाओं में ढके चेहरे,
सुबह के वह रंग सुनहरे,
अमावस का सोया चाँद,
थोडा सा खोया उन्माद,
बिखरता पर सजता विज्ञान,
खुशबुओं का झूठा ज्ञान,
दिवस की वह दिशा निराली,
रात की मदहोश लाली,
झांकती किरणों में वनवास,
विवाहिता का उपवास,
मुरझाये पुष्प की कहानी,
बारिशों की बेईमानी,
ओस का अधजिया जीवन,
धूप का पिघला हुआ मन,
वो हया के गुसलखाने,
फिर वही भूले बहाने,
पंचवटी की तलहटी,
बचपना अबोध हठी,
भावों की वह चित्रकारी,
बेबसी मेरी तुम्हारी,
भूख तो दो पर मुझे कुछ कौर भी दो,
ऐ मेरे विस्तार मुझे कुछ और भी दो,

                              

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