कभी कुछ, तो कभी कुछ और, मसला रह गया ,
कितने ही रावण जलाये एक पुतला रह गया,
वक़्त 'नीरज' सोचा था कभी सुधरेगा आगे,
आगे बढ़ना चाहा तो हिसाब पिछला रह गया ..
कितने ही रावण जलाये एक पुतला रह गया,
वक़्त 'नीरज' सोचा था कभी सुधरेगा आगे,
आगे बढ़ना चाहा तो हिसाब पिछला रह गया ..
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