मात्र एक अनुमति मांगी, इंकार कहाँ माँगा था,
हमने बस सपना माँगा, दीदार कहाँ माँगा था;
पूछे हैं सूखी आँखें टकटकी लगाए, राहों पर,
हमने बस अपना माँगा, संसार कहाँ माँगा था;
दरिया से कुछ दूर बसी जर्जर दीवारें कहती है,
हमने बस पानी माँगा, सैलाब कहाँ माँगा था;
गहरे सागर के तलहट में डूबा साहस बोल उठा,
हमने बस तिनका माँगा, पतवार
कहाँ माँगा था;
पूछ रहा है धर्म निरंतर, गिरते रोज़ आचरण से,
माँगा सिर्फ अनुसरण था,अवतार कहाँ माँगा था;
प्रश्न कर रहा समय को 'नीरज' उधड़ी हुई दरारों से,
थोड़ा बस जीवन माँगा, उद्धार कहाँ माँगा था;