Tuesday, June 27, 2023

 

मात्र एक अनुमति मांगी, इंकार कहाँ माँगा था,
हमने बस सपना माँगा, दीदार कहाँ माँगा था;

पूछे हैं सूखी आँखें टकटकी लगाए, राहों पर,
हमने बस अपना माँगा, संसार कहाँ माँगा था;

दरिया से कुछ दूर बसी जर्जर दीवारें कहती है,
हमने बस पानी माँगा, सैलाब कहाँ माँगा था;

गहरे सागर के तलहट में डूबा साहस बोल उठा,
हमने बस तिनका माँगा, पतवार कहाँ माँगा था; 

पूछ रहा है धर्म निरंतर, गिरते रोज़ आचरण से,
माँगा सिर्फ अनुसरण था,अवतार कहाँ माँगा था;

प्रश्न कर रहा समय को 'नीरज' उधड़ी हुई दरारों से,
थोड़ा बस जीवन माँगा, उद्धार कहाँ माँगा था;

 

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