रास्तों के जुगनू
Thursday, May 23, 2013
यूँ तो इस पसीने की जिद्द ही मेरा हासिल है,
पर पाने को अभी बहुत प्यास और भी है ......
Sunday, May 19, 2013
जब बेमतलब थी गर्मियां और सर्द भी,
और जम रही थी दिल की परत पर गर्द भी,
हार कर तब तुझसे फकत एक ही माँगा था,
पर वाह रे मौला! दोस्त भी दिया और दर्द भी ..
Wednesday, May 15, 2013
ये शनै शनै सरकता समय,
कुछ और उभरती पीड़ा,
फिर बिखर जाने की शंका,
और न पाने का डर,
सांझ की अनमनी व्हिस्की,
कहीं भरोसे की हिचकी,
सान्त्वना का गिलास,
आशंकाओं की हथेली,
उसका सब्र,
मेरी अलग पहेली,
कोशिशों के थकान की,
ये कैसी लाचारी है,
क्यूँ अनदेखा कल,
आज पर भारी है ....
Tuesday, May 14, 2013
दूर तो हो गया .... जो खास है,
फिर भी क्यों ग़म ... आसपास है,
इन सूखे पोखरों से समझा 'नीरज',
तू ही मेरा नीर .....तू ही प्यास है..
Saturday, May 11, 2013
जानता था धरती पर अंजुम नहीं थे,
खोजता था फिर भी जब तुम गुम नहीं थे,
ये भी 'नीरज' ख़ोज अरसे से चली है,
जब भी सोचा मिल गए तुम ....तुम नहीं थे।
Thursday, May 9, 2013
उसे हम जीना चाहते हैं,
पर जी नहीं पाते,
चाह कर भी अमृत रस,
पी नहीं पाते,
पर उसे देख पाते हैं,
तस्वीरों में,
ख़्वाबों की अनमोल,
जागीरों में,
जहाँ यथार्थ से अलग,
और उसके सामंजस्य में भी,
एकाध इच्छा पलती है,
इस हकीकत की दुनिया से परे,
लेकिन सामानांतर,
एक और दुनिया चलती है .....
रुकी रैन गुज़रती, निश्चित ही सवेरा होता,
थोड़ा ही सही पर अपना भी बसेरा होता,
अब बहुत सोचने से क्या हासिल 'नीरज',
कभी अपना कहीं ज़िक्र तो छोड़ा होता ....
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