उसे हम जीना चाहते हैं,
पर जी नहीं पाते,
चाह कर भी अमृत रस,
पी नहीं पाते,
पर उसे देख पाते हैं,
तस्वीरों में,
ख़्वाबों की अनमोल,
जागीरों में,
जहाँ यथार्थ से अलग,
और उसके सामंजस्य में भी,
एकाध इच्छा पलती है,
इस हकीकत की दुनिया से परे,
लेकिन सामानांतर,
एक और दुनिया चलती है .....
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