रास्तों के जुगनू
Sunday, May 19, 2013
जब बेमतलब थी गर्मियां और सर्द भी,
और जम रही थी दिल की परत पर गर्द भी,
हार कर तब तुझसे फकत एक ही माँगा था,
पर वाह रे मौला! दोस्त भी दिया और दर्द भी ..
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