Tuesday, May 14, 2013

दूर तो हो गया  .... जो खास है,
फिर भी क्यों ग़म ... आसपास है,
इन सूखे पोखरों से समझा 'नीरज',
तू ही मेरा नीर .....तू ही प्यास है..

No comments:

Post a Comment