रास्तों के जुगनू
Saturday, January 19, 2013
उसे देखते हुए आँख हौले से मुंद जाती है,
शायद वह मेरे साथ ही सो जाती है,
जिंदगी अब कहाँ अकेली सी लगती है,
मेरे साथ साथ सुबह की छत जगती है ....
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