अविरल नदियों के कल कल में,
झरनों के फैले अंचल में,
चुगती चिड़ियों के चह चह में,
वर्तमान घड़ियों के शह में,
माना वह संगीत नहीं है,
पर यह अंतिम गीत नहीं है;
निष्छल कोमल उजले मन में,
सरल ह्रदय के भोलेपन में,
रौशन क्रीड़ा के आँगन में,
खिलती आँखों के दर्पण में,सरल ह्रदय के भोलेपन में,
रौशन क्रीड़ा के आँगन में,
माना अब वह जीत नहीं है,
पर यह अंतिम गीत नहीं है;
दान दया के धर्म भाव में,
शवरी के जूठे स्वभाव में,
आतिथ्यों के अहो चाव में,
सूखी रोटी के प्रभाव में,
माना अब वह रीत नहीं है,
पर यह अंतिम गीत नहीं है;
किसी सखा के नए सृजन में,
प्रणय प्रिये के अंतस मन में,
भीगी पलकों की धड़कन में,
जीवन की छिटकी कतरन में,
माना अब वह प्रीत नहीं है,
पर यह अंतिम गीत नहीं है;
---------- Neeraj Tripathi
As everyone seeks more and broader connectivity, the still, small voice speaks only in silence.
---------- Neeraj Tripathi
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