वो सूरज का छिपना, अँधेरे का आना,
वो सूनी सड़क पर, था मिलना मिलाना,
वो दिल का धड़कना, वो हिम्मत के फेरे,
वो नीड़ों की चुप्पी, चिड़ियों के बसेरे ,
वो कहना बहुत कुछ, मगर कह न पाना
वो चलते हुए, उँगलियों का छू जाना ,
वो बातें, वो होठों पर प्यारी सी थिरकन,
वो गीतों का आँगन, वो शब्दों की उलझन,
वो बादल के चलने से चंदा की झलकें,
वो हल्की सी सिहरन, वो सहमी सी पलकें,
ये उस शाम का एक हिस्सा है अब बस;
ज़िंदगी का मेरी एक किस्सा है अब बस।
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