Friday, May 21, 2021

आने वाला है वो समय,
तुम बनाओगी अपना जग,
अपने मज़बूत हाथों से,
उम्मीदों की हवेली पर;

पर कैसे भुला दूँ जब,
समेट लेती थी सारा जग मेरा,
तुम्हारी नन्ही उँगलियाँ ,
उस छोटी सी हथेली पर।

 

No comments:

Post a Comment