हर पल एहसास बने फिरते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
बत्ती हो दिमाग़ की जो जल नहीं पाती,
या बौर हो आमों की जो फल नहीं पाती,
या हो सांस गरीब की जो चल नहीं पाती,
या बर्फ हो रकीब की जो गल नहीं पाती,
कतरा कतरा रोज़ गिरते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
एक सुन्दर बंगला, या कोई मोटर कार हो,
खूँटी हो दालान की, या खाट की नेवाड़ हो,
इक अदद हो नौकरी या रोकड़े की धार हो,
कैद जो न रख सके क्या ऐसा कारागार हो;
रोज़ इक नया पैबंद सिलते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
महुआ हो जाड़े का जो रुक नहीं पाया,
या शिखर हो प्रेम का जो झुक नहीं पाया,
क्या नींद हो पहरेदार की जो सुत नहीं पाया,
या हो फूल पलाश का जो गुँथ नहीं पाया,
देख नहीं पाता कब खिलते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
मदहोश की हो भावना या होश का आधार हो,
ऋषियों की हो साधना या मनुज का अवतार हो,
या हो चंदा की अमावस, बेबसी का हार हो,
जो न प्रेमी बन सका, क्या तुम उसका प्यार हो,
पवन है शांत फिर भी हिलते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
हर पल एहसास बने फिरते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
बत्ती हो दिमाग़ की जो जल नहीं पाती,
या बौर हो आमों की जो फल नहीं पाती,
या हो सांस गरीब की जो चल नहीं पाती,
या बर्फ हो रकीब की जो गल नहीं पाती,
कतरा कतरा रोज़ गिरते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
एक सुन्दर बंगला, या कोई मोटर कार हो,
खूँटी हो दालान की, या खाट की नेवाड़ हो,
इक अदद हो नौकरी या रोकड़े की धार हो,
कैद जो न रख सके क्या ऐसा कारागार हो;
रोज़ इक नया पैबंद सिलते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
महुआ हो जाड़े का जो रुक नहीं पाया,
या शिखर हो प्रेम का जो झुक नहीं पाया,
क्या नींद हो पहरेदार की जो सुत नहीं पाया,
या हो फूल पलाश का जो गुँथ नहीं पाया,
देख नहीं पाता कब खिलते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
मदहोश की हो भावना या होश का आधार हो,
ऋषियों की हो साधना या मनुज का अवतार हो,
या हो चंदा की अमावस, बेबसी का हार हो,
जो न प्रेमी बन सका, क्या तुम उसका प्यार हो,
पवन है शांत फिर भी हिलते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
हर पल एहसास बने फिरते हो,
तुम कौन हो जो नहीं मिलते हो;
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