तुम मेरे दोस्त हो शायद,
दोस्त ही होगे...
वरना तुम क्यों बार बार मेरा हाल पूछते,
क्यों मेरी उखड़ी साँसों को सींचते,
क्यों तुम अपना नहीं बताते,
क्यों मेरा सुन कर पछताते,
क्यों आँखों से मेरे बहते,
क्यों नींदों में मेरे जगते,
क्यों तुम मुझको देते दिलासा,
जब तुमको भी नहीं थी आशा,
क्यों तुम इतना समय गंवाते,
संग मेरे बच्चे बन जाते,
क्यों तुम मुझ पर गुस्सा करते,
दूर चले जाओगे, कहते,
पर तुम कहीं नहीं जाते हो,
नैन बंद, नज़र आते हो,
जब की लहू भिन्न है मुझसे,
सोचूं क्या रिश्ता है तुझसे,
तुम मेरे दोस्त हो शायद,
दोस्त ही होगे...
दोस्त ही होगे...
वरना तुम क्यों बार बार मेरा हाल पूछते,
क्यों मेरी उखड़ी साँसों को सींचते,
क्यों तुम अपना नहीं बताते,
क्यों मेरा सुन कर पछताते,
क्यों आँखों से मेरे बहते,
क्यों नींदों में मेरे जगते,
क्यों तुम मुझको देते दिलासा,
जब तुमको भी नहीं थी आशा,
क्यों तुम इतना समय गंवाते,
संग मेरे बच्चे बन जाते,
क्यों तुम मुझ पर गुस्सा करते,
दूर चले जाओगे, कहते,
पर तुम कहीं नहीं जाते हो,
नैन बंद, नज़र आते हो,
जब की लहू भिन्न है मुझसे,
सोचूं क्या रिश्ता है तुझसे,
तुम मेरे दोस्त हो शायद,
दोस्त ही होगे...
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