Saturday, September 3, 2011

पहुँचने का ज़रिया

कोई कहता है इनमे उदासी है,
कोई कहे विश्वास है,
कोई कहे एक आशा है,
कोई कहे उल्लास है,
किसी ने कहा अंतरभावना है,
किसी ने, अच्छा प्रयास है,
किसी ने सवालों का जवाब बताया,
किसी ने जवाबों पर सवाल उठाया,
किसी ने आत्मीय बताया,
कोई बस मुस्कुराया,
विविध प्रतिक्रिया मिलती है,
आभार है आप सब का,
मेरी कलम तो बस लिखती है;
बहुत से मौके आयेंगे,
जब मेरे भाव सब को नहीं भाएंगे,
माफ़ कर दीजियेगा,
मैं कोई कवि या लेखक नहीं हूँ,
कोई विदूषक नहीं हूँ,
एक अदना सा ठहराव हूँ,
असल जिंदगी में ज़रा घबराता हूँ,
इसलिए भाव,
कागज़ पर दर्शाता हूँ,
लेखन मेरा शौक ही नहीं है,
आप तक पहुँचने का ज़रिया भी है,
खुद को ढूँढने का आगाज़ है,
वरना डूबने को और दरिया भी है;

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