Friday, September 9, 2011

दिल है तो धड़केगा भी

बड़ा लंबा सफ़र है,
धूप है, मेड़ों की,
छांव है, पेड़ों की,
कुछ सुस्ता लो,
पांव फैला लो,
यात्रा है ये,
कोई रेस नहीं है,
ज़रा रुक जाओगे,
तो कोई क्लेश नहीं है,
हौसला है तुम्हारा,
बढ़ेगा तो थकेगा भी,
और स्थिर है तो चलेगा भी;

किसे पुकारते हो,
क्यों पुकारते हो,
अधिकतर मायावी हैं,
क्यों दुलारते हो,
पहले खुद की तो सुनो,
कुछ और उम्मीदें बुनो,
चाहे कुछ देर बेमन से जियो,
पर एक प्याला और पियो,
उस तक बात जायेगी,
कहानी लौट आएगी,
समझेगा तो चुनेगा भी,
सोच है तो सुनेगा भी;

अब भी याद आता है,
कोई बात नहीं,
बिछड़ा दर्द कहाँ जाता है,
पर इसमें इसका,
कसूर नहीं है,
ये बस एक ठहराव है,
नासूर नहीं है,
कुछ समय और याद आएगा,
फिर दराजों में,
दफ़न हो जाएगा,
भीगा है तो फूलेगा भी,
याददाश्त है तो भूलेगा भी;

क्यों चेहरा लाल करते हो,
एक उलझन और इतना गुस्सा,
कमाल करते हो,
आँखें बंद हैं तो काली दिखती है,
खिडकियों को खोलो,
अब भी पूरब की लाली दिखती है,
ये दिल के मामले हैं,
दिलों से सुलझेंगे,
लहू भड़केगा,
तो और उलझेंगे,
आँधियों में खड़केगा  भी,
दिल है तो धड़केगा भी;

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