जब आशाओं की वादी में सदमे का थोड़ा लहू गिरा,
तब शून्य ह्रदय वीराने में, इक डर का काला मेघ घिरा,
ये मन बदला, दर्पण बदला, पुष्पों का यौवन भी बदला,
बदली धरती, बदला मौसम, अम्बर का पौरुष भी बदला,
बदले जुगनू, बदले बादल, बदला मिज़ाज कुछ सावन का,
...बदली राहें, बदली चाहत, बदला स्वरुप मनभावन का,
बदलाव हुआ ऐसे कैसे, पावन थे बंधन, छिन्न हुए,
जब एक ह्रदय था, एक थी भाषा, देखो कैसे भिन्न हुए.
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