रास्तों के जुगनू
Saturday, February 5, 2011
साथ चलना चाहता हूँ
रोज़ कुछ साथ चलना चाहता हूँ;
रोज़ कुछ बात करना चाहता हूँ;
रोज़ कुछ बेगाना पाना चाहता हूँ;
रोज़ कुछ खज़ाना खोना चाहता हूँ;
...
चाहते हैं ये, बनी रहती हैं;
रोज़, रोज़ की तरह गुज़र जाता है;
एक पग आगे बढाने की चाहत में;
रास्ता ही बीच में ठहर जाता है.
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