Saturday, February 5, 2011

तुम जल्दी लौट कर आना

तुम्हारे रंगों के संगम का इक आगाज़ बाकी है,
तुम जल्दी लौट कर आना अभी इक राग बाकी है.
पतंग तो उड़ चुकी लेकिन थोड़ा गुलाल बाकी है;
तुम जल्दी लौट कर आना अभी त्यौहार बाकी है.
हवा में ओस की बूँदें, जाड़े की सेज बाकी है;
तुम जल्दी लौट कर आना सूर्य का तेज़ बाकी है.
इशारों में समझ जाना, बहुत कुछ कहना बाकी है;
तुम जल्दी लौट कर आना अभी संग रहना बाकी है.
मैं रहूँगा बचकर, की मेरा मन ही साकी है;
तुम जल्दी लौट कर आना की बस इक नीर बाकी है.
मेरी भूलों के प्रायश्चित का इक भंडार बाकी है;
तुम जल्दी लौट कर आना नया संसार बाकी है.
सिसकना तब भी बाकी था, बहकना अब भी बाकी है;
तुम जल्दी लौट कर आना अभी सब कुछ ही बाकी है.
बहुत कुछ और लिखता मैं की पूरी रात बाकी है;
ह्रदय का प्रेम है बस ये कहाँ अब लफ्ज़ बाकी है.

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