अपनों से दिल की बात, सुनहरी आँखों के ज़ज्बात;
बारिश में भी साथ, तुम्हारे हाथों में इक हाथ ;
चाँद की उजियारी रात, भोर के आने की सौगात;
जब सब बेगाना लगता हो.......
तो वापस जाना वहीँ, जहाँ तुम ह्रदय गंवाया करते थे;
जब दिल में कोई बात न थी, तब भी हकलाया करते थे;
जब आँखों पर चश्मा डाले, तुम तारे रोज़ गिनाते थे;
जब जाग रही दुनिया सारी, तुम बरबस ही सो जाते थे;
अच्छा होगा बदलाव यही, यदि समय समय पर किया करें,
इस मोह मायावी दुनिया में, आओ थोड़ा सा व्यर्थ जियें I
बारिश में भी साथ, तुम्हारे हाथों में इक हाथ ;
चाँद की उजियारी रात, भोर के आने की सौगात;
जब सब बेगाना लगता हो.......
तो वापस जाना वहीँ, जहाँ तुम ह्रदय गंवाया करते थे;
जब दिल में कोई बात न थी, तब भी हकलाया करते थे;
जब आँखों पर चश्मा डाले, तुम तारे रोज़ गिनाते थे;
जब जाग रही दुनिया सारी, तुम बरबस ही सो जाते थे;
अच्छा होगा बदलाव यही, यदि समय समय पर किया करें,
इस मोह मायावी दुनिया में, आओ थोड़ा सा व्यर्थ जियें I
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