नहीं मिल पाते हैं अक्सर , नहीं हो पाती है बातें;
बड़े खामोश से दिन हैं, बड़ी खामोश हैं रातें ;
जबकि जानता है मन दिलों की है ये मज़बूरी;
ये सन्नाटा नहीं है, है समय की सिर्फ ये दूरी;
मदहोश होता सोच, खुलेंगे जब ये दरवाज़े;
न होगा फिर ये सन्नाटा न होंगी इतनी आवाजें.
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