Saturday, June 20, 2020

अबकी,
जो गए तुम,
तो आये हो,
फूलों से लदे,
बड़की ट्रक में,
कितनी बड़ी फोटू लगी है,
तुम्हारी हर जगह,
बीसन गांव के लोग,
सड़क पर जमा हैं,
बड़ी जयकार हुई है,
तोहरे नाम की,
बाबू न कहते थे,
बड़े गाजा बाजा के साथ,
आएगा एक दिन,
तिलक बेटवा का,
पर अबकी माई,
शरबत न घोली,
न ही माठा गुड़ लाई,
बस बैठी रही दुआरे,
दूसरी औरतन के बीच,
अबकी बाबू भी न बोले कुछ,
​उनको झण्डा मिला है,
जन गन मन वाला,​
बड़के ओसारे में,
खूँटी के ऊपर,
है फोटू तुम्हारी,
और खूँटी पर,
टांग दिया है हैंगर में,
वो चितकबरी वर्दी,
जो थी,
तुम्हारी दूसरी चमड़ी।  

No comments:

Post a Comment