Friday, June 12, 2020

जो साथ बिताये लम्हे हैं, वो सब तो याद रहेंगे ही,
जो साथ बिताया दुरी से, तुम उसको नहीं भुला देना।

वो बातें जो गुपचुप से की, उनकी ठंडी तासीर रही,
वो जम जायेंगी चुप्पी में, उन्हें थोड़ा हिलाडुला देना।

जो धुएँ में लिपटे लम्हे थे, जो कांच सरीखा शामें थी,
वो अलग अलग हो जायेंगे, उनको भी मिलाजुला देना।

अंदेशा कुछ पहले से था, जो राज़ बताये थे तुमने,
मैंने भी ठान लिया था तब, बस सुनकर उन्हें सुला देना।

वो साथ ठिठोली बातों का, वो मस्त ठहाका जीवन का,
मैं साथी मुक्त हँसी का हूँ, तुम मुझको नहीं रुला देना।

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