Friday, March 29, 2013


वास्तविकता भी वास्तविकता से कितनी भिन्न हो सकती है, यह शहर मुझे बताता है। बेजान सड़कों की लम्बाईयों को नापती बेशुमार गाड़ियाँ और उन्ही गाड़ियों में दौड़ती जिंदगी। सब भाग रहे हैं; किसी और की खोज में ... और खोते जा रहे हैं स्वयं को ..एक और स्वयं पाने के लिए। यह शहर दोहरी वास्तविकता का सब से सजीव उदहारण है जो आप को नए आयाम दिखाता है, नई बोली सिखाता है, नई पहचान दिलाता है, नई प्रतिभाओं से मिलाता है ...बस आपका आपसे मेल नहीं करा पाता।

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