रास्तों के जुगनू
Tuesday, March 12, 2013
तब तुम नहीं रुके और एक बसंत गुज़र गया,
आज तुम नहीं हो तो इक और गुज़र जाएगा,
ये मौसम जिंदगी की मज़बूरियों का मोहताज़ नही,
कल तुम रहो न रहो, फिर
बसंत ज़रूर आएगा .....
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