Friday, March 15, 2013

....एक और अँधेरे का छिपना
....एक और भोर का बहकना
....एक और ख्व़ाब का जगना
....एक और सूरज का उगना
....एक और दिन का निकलना
.... एक और उम्मीद का संवरना 
दिशाओं को लकीरों से मिलाइये
जीने के लिए और क्या चाहिए ....

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