Friday, February 14, 2014

परिवर्तनशील जिंदगी

कमरे में  कुर्सियों की पहचान बदल जाती है,
दूधवाले भैया की मुस्कान बदल जाती है,
चिड़ियों के सुरों की तान बदल जाती है,
रोज़मर्रा के चीज़ों की दुकान बदल जाती है,

बदल जाती है सरसराहट नल के आने की,
बदल जाती आवाज़ दरवाज़ा खटखटाने की,
बदल जाती जगह अखबार को पाने की,
बदल जाती है खिड़की रोशनी अन्दर आने की,

घर खुला रखने की परेशानी बदल जाती है,
किसी के घर में होने की निशानी बदल जाती है,
महज़ एक मकान बदल लेने से,
हमारी कितनी जिंदगानी बदल जाती है,

दोस्तों, यूँ तो बदलाव की अपनी मीठी थकान है,
पर हमारा जीवन भी एक किराए का मकान है,
ठहराव है, बदलाव है, रोज़ नया आयाम है,
परिवर्तनशील जिंदगी, तुझे मेरा सलाम है.

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