कुछ यादों का बिछौना भी बना लेना,
महज़ लिहाफ़ों में ये सर्द रात कटे .... न कटे,
किसी कि फ़िक्र हो शायद किसी का ज़िक्र हो शायद,
सूरज ओढ़ कर सोना, ये कोहरा छंटे .... न छंटे।
महज़ लिहाफ़ों में ये सर्द रात कटे .... न कटे,
किसी कि फ़िक्र हो शायद किसी का ज़िक्र हो शायद,
सूरज ओढ़ कर सोना, ये कोहरा छंटे .... न छंटे।
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