कितने ही रंज तूने राह में बिछाये हैं,
दो पल के बीच दिए कैसे स्याह साये हैं,
तेरी बारीकियाँ तो तू ही जानता है मगर,
हम भी ज़िद्दी हैं चलने के लिए आये हैं,
मीलो मील पड़े चलना तो ज्यादा क्या है,
ज़िंदगी और बता तेरा इरादा क्या है …।
दो पल के बीच दिए कैसे स्याह साये हैं,
तेरी बारीकियाँ तो तू ही जानता है मगर,
हम भी ज़िद्दी हैं चलने के लिए आये हैं,
मीलो मील पड़े चलना तो ज्यादा क्या है,
ज़िंदगी और बता तेरा इरादा क्या है …।
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