Sunday, May 1, 2011

मेरा उल्लू

आज क्यों आँखें अचानक नम हुई,
एक दिल की आरज़ू थी, कम हुई...

कोई कुछ भी कहे पर सदा मैंने ये माना है,
किसी को याद करना भी किसी के पास जाना है...
 उस अलसाई सी शाख पर,
जो मेरा उल्लू बैठा था...
किसी का दिन था वो,
मेरी रातों पर ऐंठा था,
कुहासे का वो आलम,
कैसे ख़ाक हुआ,
किसी को याद करना भी,
यहाँ मज़ाक हुआ....
 





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