जिंदगी एक बार फिर तुझसे,
रूबरू होके सरलता पा लूँ;
इन असहज लम्हों में निकटता पा लूँ,
इस भागती बेसब्री में शिथिलता पा लूँ,
...कोई मंजिल मिले न मिले,
इन राहों को चलने में सफलता पा लूँ;
इन गर्म लू के थपेड़ों में सहजता पा लूँ,
इस प्यास में प्यास को तड़पता पा लूँ,
कोई वटवृक्ष मिले न मिले,
इस ह्रदय की छाया में तरलता पा लूँ;
जिंदगी एक बार फिर तुझसे,
रूबरू होके सरलता पा लूँ;
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