व्याकुल सुबह, मचलता दिन और भर्राई शाम,
हँसता दुःख, रोती ख़ुशी और लवों पर नाम,
मेरा भी, तेरा भी, संदेशों का पैगाम,
कुछ गलतियों से सीख, कुछ उनका अंजाम,
कितना कुछ तो पा लिया, और क्या पायेंगे,
तुम्हारे दर से लौटे हैं अब और कहाँ जायेंगे...
हँसता दुःख, रोती ख़ुशी और लवों पर नाम,
मेरा भी, तेरा भी, संदेशों का पैगाम,
कुछ गलतियों से सीख, कुछ उनका अंजाम,
कितना कुछ तो पा लिया, और क्या पायेंगे,
तुम्हारे दर से लौटे हैं अब और कहाँ जायेंगे...
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