किसी ने बड़े सलीके से तह करके,
दराजों में बंद किया,
और फिर खोलना भूल गया,
किसी ने ताबूत में उतारा,
मिटटी में झुकाया,
...और ढंकना भूल गया,
किसी ने बड़ी बड़ी बातें की,
सपने दिखाए,
और सुलाना भूल गया,
इन सब के बावजूद जिंदा हूँ,
रात का तीसरा पहर है,
पर कोई कहता है,
इसके बाद सहर है......
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