आज का दिन थका हुआ निकला था; जैसे बीते हुए कल का बोझ लेकर चल रहा हो /
कुछ समय तक मुझे ऐसा आभास होता रहा, परन्तु यह मेरा भ्रम मात्र था / हल्के
तैरते बादल जो अचानक कहीं से आ गए थे, अचानक ही कहीं चले गए / आठ बजते तक
उमस और गर्मी ने शरीर को चिपचिपा बना दिया / ऑफिस पहुँचते पहुँचते पीठ गीली
हो चुकी थी, जैसे होली में कोई पीछे से आपके ऊपर अपनी पिचकारी खाली कर
देता है / और ये सब भी तब जब मैं अपनी पांच महीने पुरानी लोन लेकर खरीदी
नई कार के एयर कंडिशनर को तकलीफ पहुंचाता रहा था / सीट से चिपकी पीठ पर
उसका असर न के बराबर था / आज रास्ते भर मैं यह सोचता रहा की रोज़ कैसे एक
नया दिन आ जाता है, बिल्कुल पुराने दिन की तरह / कुछ भी तो अलग नहीं था;
हाँ ! स्टीरिओ में एक परिचित गाना बज रहा था " करोगे याद तो हर बात याद
आएगी, गुज़रते वक़्त की हर मौज़ ठहर जायेगी " ; 'बाज़ार' फिल्म में भूपेंद्र
का स्वरबद्ध किया यह मेरे पसंदीदा गीतों में है / ये पुरानी बात करता है
पर प्रत्येक बार मैं इसे एक नए अंदाज़ में सुनता हूँ / एक नए दिन की तरह
जिसमे तारीख तो बदल जाती है पर एहसास नहीं बदलते / क्या मैं आगे नहीं
देखता, क्या मैं अब भी बीते हुए कल में ही जीता हूँ; ऐसा क्या है मेरे
इतिहास में जो मुझे बार बार वापिस ले जाता है; कुछ भी तो नहीं; कुछ भी
विशेष या अप्रत्याशित नहीं; फिर क्यों ! क्या कुछ खोने का डर मेरे कुछ पाने
की लालसा पर भारी है ; पर खोने को ऐसा क्या है / फिर वही रोज़ के ख़याल,
फिर वही रोज़ की सोच, फिर वही रोज़ की बातें; वही दफ्तर, वही कुर्सी मेज़,
वही कर्मचारी, वही चाय की प्याली, वही कागजों का पुलिंदा, वही कंप्यूटर की
पुरानी साजिशें, वही बॉस की अनकही फरमाइशें, वही मैं और वही मेरी संकुचित
दुनिया / बीती रात सोचा था; कल एक नया दिन है; नया दिन आया, पुराने अंदाज़
में; ये मेरी सोच की कमी है या स्वभाव की !!
ई मेल और फेसबुक गतिविधियों से भरे पड़े हैं; कितनी ही नई कवितायेँ, तस्वीरें, सन्देश ! कितने ही सन्देश कहते हैं," ये मेरी अपनी लाइफ है, मैं इसे अपने ढंग से जीऊंगा; किसी को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं, मुझे एक बार ही जीना है इसलिए मेरी मर्ज़ी सर्वोपरि है" / या फिर उन लोगों के उदाहरण हैं जिन्होंने ने जो करना चाहा वो किया, प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद; जो अपने ढंग से जिए, अपने सपनों को साकार करने के लिए, जो साधारण इंसान थे परन्तु असाधारण कार्य कर बैठे / यह सब पढ़ना मुझे अच्छा लगता है; बस एक ही बात दिल को कचोटती है, कि उन लाखों लोगों का क्या जो इसी चाहत में सब कुछ गवां बैठे; जिन्हें आज कोई नहीं जानता, जिनका ज़िक्र कहीं नहीं होता; जो अपने पीछे रोते बिलखते परिवार छोड़ गए; आकाश की चाहत में धरा ही छोड़ गए / उनकी भी तो एक ही लाइफ थी, उन्हें भी सफलता और जीवन से प्रेम रहा होगा, उन्होंने भी मशक्कत की होगी / ये सब मुझे कन्फ्यूज़ करता है; चेतावनी देता है कि सपनों को पाने के लिए कोई अलग दुनिया नहीं है; हकीकत यहीं है और इसी में से गुज़रना है; अपनी गणित ठीक कर लो, कितना और पा सकते हो; कितना खोना पड़ेगा, प्राफिट होगा या लोस ; क्या अंजाम झेलने की भी क्षमता है या ये तय है कि जो चाहते हो वो मिल जाए तो बाकी सब स्वयं ठीक ही रहेगा /
ये शायद मेरी समस्या ही नहीं अपितु उन सब की भी है जो मस्तिष्क, ह्रदय और भावनाओं के बुने जालों में रहते हैं / जो सोच रखते हैं और समझ तो सकते हैं पर सपने अपनी सोच और समझ से ऊपर देखना पसंद करते हैं / जो कुछ और करना तो चाहते हैं पर ठीक से नहीं जानते कि क्या; जो समाज में रहते भी हैं और अलग भी हैं; जिन्हें लोग स्वीकार करते हैं पर वे खुद को स्वीकृत नहीं समझते / यह जटिल है / समाजिकता और इच्छाओं के दाँव पेंच में इनकी पतंग न ही ऊपर जा पाती है और न ही नीचे आती है / बस उड़ती रहती है, अनमनी सी, पवन के वेग में, कभी तेज़ कभी धीमी / ये साहस का अभाव नहीं है; जिम्मेदारियों का आभास है जो उन्हें यह रिस्क लेने से रोकता है / हर नया दिन पुराने दिनों कि तरह एक और नए दिन का इंतज़ार करता है /
ई मेल और फेसबुक गतिविधियों से भरे पड़े हैं; कितनी ही नई कवितायेँ, तस्वीरें, सन्देश ! कितने ही सन्देश कहते हैं," ये मेरी अपनी लाइफ है, मैं इसे अपने ढंग से जीऊंगा; किसी को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं, मुझे एक बार ही जीना है इसलिए मेरी मर्ज़ी सर्वोपरि है" / या फिर उन लोगों के उदाहरण हैं जिन्होंने ने जो करना चाहा वो किया, प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद; जो अपने ढंग से जिए, अपने सपनों को साकार करने के लिए, जो साधारण इंसान थे परन्तु असाधारण कार्य कर बैठे / यह सब पढ़ना मुझे अच्छा लगता है; बस एक ही बात दिल को कचोटती है, कि उन लाखों लोगों का क्या जो इसी चाहत में सब कुछ गवां बैठे; जिन्हें आज कोई नहीं जानता, जिनका ज़िक्र कहीं नहीं होता; जो अपने पीछे रोते बिलखते परिवार छोड़ गए; आकाश की चाहत में धरा ही छोड़ गए / उनकी भी तो एक ही लाइफ थी, उन्हें भी सफलता और जीवन से प्रेम रहा होगा, उन्होंने भी मशक्कत की होगी / ये सब मुझे कन्फ्यूज़ करता है; चेतावनी देता है कि सपनों को पाने के लिए कोई अलग दुनिया नहीं है; हकीकत यहीं है और इसी में से गुज़रना है; अपनी गणित ठीक कर लो, कितना और पा सकते हो; कितना खोना पड़ेगा, प्राफिट होगा या लोस ; क्या अंजाम झेलने की भी क्षमता है या ये तय है कि जो चाहते हो वो मिल जाए तो बाकी सब स्वयं ठीक ही रहेगा /
ये शायद मेरी समस्या ही नहीं अपितु उन सब की भी है जो मस्तिष्क, ह्रदय और भावनाओं के बुने जालों में रहते हैं / जो सोच रखते हैं और समझ तो सकते हैं पर सपने अपनी सोच और समझ से ऊपर देखना पसंद करते हैं / जो कुछ और करना तो चाहते हैं पर ठीक से नहीं जानते कि क्या; जो समाज में रहते भी हैं और अलग भी हैं; जिन्हें लोग स्वीकार करते हैं पर वे खुद को स्वीकृत नहीं समझते / यह जटिल है / समाजिकता और इच्छाओं के दाँव पेंच में इनकी पतंग न ही ऊपर जा पाती है और न ही नीचे आती है / बस उड़ती रहती है, अनमनी सी, पवन के वेग में, कभी तेज़ कभी धीमी / ये साहस का अभाव नहीं है; जिम्मेदारियों का आभास है जो उन्हें यह रिस्क लेने से रोकता है / हर नया दिन पुराने दिनों कि तरह एक और नए दिन का इंतज़ार करता है /
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