रास्तों के जुगनू
Sunday, July 31, 2011
ज़रा मुश्किल है
ज़रा मुश्किल है,
पर संभव है,
भटके वादों में,
बिखरी यादों में,
उलझे रस्तों में,
बंद पड़े बस्तों में,
सूखी आँखों में,
बुझती साँसों में,
बहकी बातों में,
जगती रातों में,
खिलखिलाकर हँसना,
ज़रा मुश्किल है,
पर संभव है.
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