रास्तों के जुगनू
Tuesday, March 22, 2011
सीमाएं
आज फिर,
जिंदगी मुझसे ,
और मैं उससे,
कुछ मांग रहे हैं...
यकीन और हकीकत की,
...
दुनिया से परे,
अपनी ही सीमाएं,
लांघ रहे हैं.
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