Tuesday, March 22, 2022

 

बढ़ता हुआ भाव, घटता हुआ चाव,
न रहेगा ही ताव, न कोई हरा घाव, 
जब तक खुलेगी आँख, दो ही बचेंगे,
एक बिलखती नदी, एक टूटी हुई नाव

 

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