यूँ अनगिनत
विचारों की अमिता,
या शब्दों को
सजाने की रमिता,
साहित्य के
गोद की बबिता,
या उकेरती
समाज की पतिता,
दीवार के
उस पार की हरिता,
या कुछ अनछुए
भावों की रचिता,
मात्र कागज़ पर
भावों की सरिता,
या तिमिर में
जुगनू की सविता,
आखिर क्या होती है कविता?
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