Tuesday, June 8, 2021

तब न कभी आपस में गिला करते थे,
खुशबू और हवा रोज़ मिला करते थे,
क्या हुआ कि काँटे भी नहीं बचे उस पर,
जिस हथेली पर गुलाब खिला करते थे।

 

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