Tuesday, June 1, 2021

जब कि एक ही बगीचा,
दोनों को बराबर सींचा,
रखा दोनों के लिए,
एक ही भाव,
फिर क्यूँ हैं,
ये दो प्रभाव,
कैसे सीखा एक ने मुस्काना,
और दूसरे ने चुभ जाना;

बेशक दोनों को दिया,
समान प्यार, समान दुलार,
समान भाव,
पर दोनों के हैं,
पृथक स्वभाव,
जितना है ज़रूरी मुस्काना,
उतना ही ज़रूरी है चुभ जाना,
इस जगत में,
हर प्रभाव की ज़रूरत है,
और वास्तव में ये,
एक दूसरे का पूरक है;
स्वीकार करो कि हम सब,
एक ही प्रकृति की देन हैं,
​बेशक रखो,
सब के लिए समान भाव,
पर स्वीकार करो,
विभिन्न स्वभाव।

 

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