रास्तों के जुगनू
Monday, August 31, 2020
जो लम्हे न हुए कैद उन हया सरीखी बातों में,
रहे साथ वो एक समय तक उजली पिघली रातों में,
सूख गए हैं पवन वेग से मिले हुए आघातों में,
टांग दिए थे दिन जो हमने बेमौसम बरसातों में,
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