मैं तुमसे पहले आया था,
तुमसे ज्यादा चला भी,
चल रहा हूँ अब भी....
तुम बाद में आये बहुत,
और रुके रहे अक्सर,
रुके हुए हो अब भी,
मुझ पर खर्च हुआ थोड़ा,
पर मुझे इस्तेमाल किया ढेर सारा,
जब जिसका मन किया ....
तुम पर खर्च हुआ ढेर सारा ,
पर तुम्हे इस्तेमाल किया थोड़ा
जब सबका मन किया,
मेरा रख रखाव भी आसान है,
एक कपडे से झाड़ कर,
कभी कहीं भी रख दिया ....
तुम्हारा रख रखाव आसान नहीं,
एक निश्चित जगह रहे तुम,
और तकनीकी लोग रहे तुम्हारी सेवा में,
जब कि एक ही घर परिवार घराना,
फिर क्यों है ये भेद करते सभी,
मेरी शिद्दत में तो कोई कमी नहीं,
फिर जाना कि मैं शीतल नहीं,
तुम्हारी तरह,
बस यही कसूर है मेरा,
अब सुकून है ज़िंदगी में,
हमारा अपना स्वभाव है,
अपनी किस्मत भी,
तभी तो तुम बन गए,
स्प्लिट ए सी,
और हम रह गए पेडस्टल फैन ....
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