अरसे बाद बात हुई,
न उसने पहचाना,
न हमने बताया,
कुछ देर तक सिलसिला,
यूँ ही चला,
फिर बताना पड़ा,
हूँ वही सिरफिरा,
आभारी हूँ,
कुछ ऐसे लोगों का भी,
जो आज बस आभास हैं,
पर किन्ही दिनों के,
बेहद ख़ास हैं,
न उसने पहचाना,
न हमने बताया,
कुछ देर तक सिलसिला,
यूँ ही चला,
फिर बताना पड़ा,
हूँ वही सिरफिरा,
आभारी हूँ,
कुछ ऐसे लोगों का भी,
जो आज बस आभास हैं,
पर किन्ही दिनों के,
बेहद ख़ास हैं,
जो बीती हवाओं के झूले पर,
झूलते नहीं,
याद नहीं रख पाते,
पर भूलते नहीं ...
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